Creative · Prose7/22/2026
🌐 आज का युवा: सोशल मीडिया का गुलाम या परिवर्तन का सिपाही! 🚀
by Anil Sharma
वृक्ष पर खिले फूलों की तरह महकता यौवन, आज सोशल मीडिया की दीमक से खोखला हो रहा है या नवाचार की नई उड़ान भर रहा है....
22 june 2026
मानव जीवन के विभिन्न पड़ाव हैं किंतु सबसे मूल्यवान अवस्था यौवन है। इस अवस्था के गुणों और विशेषताओं पर जितनी बात उतनी कम है। जब वृक्ष पर फल लगने शुरू होते हैं तो उस वृक्ष की यह अवस्था यौवन है, जब वृक्ष पर पत्तों के साथ मंजरियां एवं फूल लगते हैं तो पूरा वातावरण सुगन्धित व मदमोहित हो उठता है, भौंरे-कीट पतंगो की घुड़दौड़ शुरू हो जाती है, हवाएँ उस स्पर्श से हिल्लोरे मारना शुरू कर देती हैं, तितलियाँ उन फूलों का रस-पान करने के लिए पुलक उठती हैं वही तो है उस वृक्ष के यौवन का जादू!
यह बात थी एक वृक्ष के संदर्भ में पर मानव के संदर्भ में तो चेष्टाएँ - आकांक्षाएँ और बढ़ जाती हैं। यौवन क्या है?, यह अन्य अवस्थाओं में श्रेष्ठ क्यों है? असल में देखा जाए तो यौवन कोई एक अवस्था को संदर्भित नहीं करता है यह एक ऊर्जा चक्र को भी चिन्हित करता है इसी समय ऊर्जा अपने चरम बिंदु पर पहुँचने की ओर अग्रसर होती है जिसे हम जिस दिशा में मोड़ेंगे वो वहीं जाएगी और अपना काम करेगी।
मानवीय इतिहास को देखें तो पता चलेगा दुनिया के जितने भी आविष्कार या खोज हुई है उनका औसतन प्रस्फुटन इसी अवस्था के दौरान हुआ। मानवीय इतिहास का विश्लेषण करें तो, हमारा विकास विभिन्न कालखंडों के निरंतर गतिशीलता एवं नवाचार के चारों ओर देखा जा सकता है। प्रारंभिक दुनिया का मानव घुमंतू प्राणी के भाँति इधर-उधर टहलता था, फिर जब समय बीता तो परिवहन के साधन विकसित हुए जिनसे यात्रा परंपरा थोड़ी आसान हुई फिर इसी समय चक्र में मानव ने आधुनिकता की ओर बढ़ना प्रारंभ किया जिसका परिणाम हम आज 21वीं सदी में देख सकते हैं।
इसे भी हम समय चक्र की यौवन अवस्था कह सकते हैं क्योंकि एक समय पर मनुष्य घुमंतू जीवन यापन से विचरण करता था और अब इस आधुनिकता की काली सड़क पर जहाँ परिवहन के साधन के रूप में मोबाइल, कंप्यूटर, internet, नेटवर्क एवं सोशल मीडिया है। इन साधनों से मानव एक ऐसी दुनिया में प्रवेश कर सकता है जहाँ भौतिकता तो नहीं है पर एक अदृश्य और विचारों द्वारा गढ़ी हुई सभ्यता जरूर है जो पलकें झपकाते ही दूसरे गाँव में पहुँच जाए, पलकें झपकाते ही दूसरे राष्ट्र पहुँच जाए, पलकें झपकाते ही चन्द्रमा व तारों के खुद रहस्यों को जान पाए।
आज के भारतीय समाज को देखो तो हमें हमारे ऋषि-मुनियों एवं महापुरुषों का ख्याल आता है जो आज के आधुनिक साधनों से अवगत तो नहीं थे किंतु अपनी ऊर्जा से अवश्य थे, उन्होंने उसे सही समय पर सही अवसर में लगाया और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दिया।
किंतु आज के युवा इन सोशल मीडिया के मनोरंजन में इतने विलीन हो गए हैं कि उन्हें न तो समय का आभास रहता है न खुद का, अपनी यौवन ऊर्जा को जहाँ खर्च करना था वहाँ से हटकर इस सोशल मीडिया की आँधी में समा गए हैं, और यही सोशल मीडिया आज युवा को दीमक के भाँति खोखला करती जा रही है, उनमें न तो नैतिकता बची है और न ही संवेदनशीलता। अपने कुछ लाइक्स और फॉलोवर्स के चक्कर में अपनी सीमाएँ लांघ जाते हैं, रिश्तों में अपनापन नहीं बचा। अश्लीलता एवं दुराचार के फलों में रस ढूंढ रहे हैं जो केवल छलावा और माया का पर्दा है, वास्तविक आनंद तो समाज एवं लोक कल्याण के उत्थान से है, देश में बदलाव लाने में, प्रौद्योगिकी में उलझने में नहीं बल्कि उसे और विकसित करने में है जिससे आज का युवा कोसों दूर है, जो आने वाले समय में लोकल एवं वैश्विक समस्या की चिंगारी जलाएगी।
किंतु सब जगह अंधेरे के बादल नहीं मंडराते बल्कि कुछ घरों में सपनों के दीपक एवं नवाचार की ढिबरीया भी जलती है। इस आधुनिक आँधी में कई उड़े हैं तो कई जुड़े भी हैं, जहाँ पहले गाँवों में शिक्षा मंदित छते थी, वहाँ अब सपनों के मंदिर बनने लगे हैं।
ज्ञान की गंगा इसी सोशल मीडिया के समंदर में प्रवाहित हो रही है। जो जिज्ञासु है, ज्ञानपिपासु है वो इस समंदर से भी गंगा स्नान कर लेगा और इसी राष्ट्र के विकास की सीढ़ियों को गढ़ेगा, और एक दिन सफलता के आसमान को छुएगा। युवा समाज की रीढ़ है और वही नए-नए स्टार्टअप्स जैसे नवाचारों से देश को जागृत करने में अपना योगदान देता जा रहा है।
किसी वस्तु के अगर नकारात्मक प्रभाव हैं तो उसके सकारात्मक दर्शन भी होंगे, जो जैसे दृष्टिकोण और रास्ते से अन्वेषण करेगा वो वैसा ही प्राप्त करेगा। यह उस युवावर्ग पर निर्भर करता है कि इन सुविधाओं के जल को वहन करना है या बहते रहने देना।
Yahe hai acutal version maine kuchh galtiya thik kardi hai jo apne typing ke waqt ki
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